वाक्य व इसके भेद।

 

वाक्य (Syntax) की परिभाषा


वह शब्द समूह जिससे पूरी बात स्पष्ट हो जाये, 'वाक्य' कहलाता हैै।

सरल शब्दों में- सार्थक शब्दों का व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ प्रकट हो, 

वाक्य कहलाता है।

जैसे-आकाश खेल रहा है, निर्मला नाच रही हैैै।


वाक्य के भाग

वाक्य के दो अंग होते है-

(1) उद्देश्य (Subject) 

(2) विधेय (Predicate)


(1)उद्देश्य (Subject):-

वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाये, उसे उद्देश्य कहते हैं। 

सरल शब्दों में- जिसके बारे में कुछ बताया जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं।

जैसे- पूनम किताब पढ़ती है। सचिन दौड़ता है।


(2)विधेय (Predicate):- 

उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, उसे विधेय कहते है।

जैसे- नीतू किताब पढ़ती है।

इस वाक्य में 'किताब पढ़ती' है विधेय है क्योंकि नीतू (उद्देश्य )के विषय में कहा गया है।


वाक्य के अनिवार्य तत्व

वाक्य में निम्नलिखित छ तत्व अनिवार्य है-

(1) सार्थकता

(2) योग्यता 

(3) आकांक्षा

(4) निकटता 

(5) पदक्रम 

(6) अन्वय


(1) सार्थकता- 


वाक्य का कुछ न कुछ अर्थ अवश्य होता है। अतः इसमें सार्थक शब्दों का ही प्रयोग होता है।


(2) योग्यता - 


वाक्य में प्रयुक्त शब्दों में प्रसंग के अनुसार अपेक्षित अर्थ प्रकट करने की योग्यता होती है। 

जैसे- चाय खाई ।यह वाक्य नहीं है क्योंकि चाय खाई नहीं जाती बल्कि पी जाती है।


(3) आकांक्षा- 


आकांक्षा का अर्थ है 'इच्छा', वाक्य अपने आप में पूरा होना चाहिए। उसमें किसी ऐसे शब्द की कमी नहीं होनी चाहिए जिसके कारण अर्थ की अभिव्यक्ति में अधूरापन लगे। जैसे- पत्र लिखता है, इस वाक्य में क्रिया के कर्ता को जानने की इच्छा होगी। अतः पूर्ण वाक्य इस प्रकार होगा- राम पत्र लिखता है।


(4) निकटता- 


बोलते तथा लिखते समय वाक्य के शब्दों में परस्पर निकटता का होना बहुत आवश्यक है, रूक-रूक कर बोले या लिखे गए शब्द वाक्य नहीं बनाते। अतः वाक्य के पद निरंतर प्रवाह में पास-पास बोले या लिखे जाने चाहिए। राम खेलता है।


(5) पदक्रम - 


वाक्य में पदों का एक निश्चित क्रम होना चाहिए। 'सुहावनी है रात होती चाँदनी' इसमें पदों का क्रम व्यवस्थित न होने से इसे वाक्य नहीं मानेंगे। इसे इस प्रकार होना चाहिए- 'चाँदनी रात सुहावनी होती है'।


(6) अन्वय - 


अन्वय का अर्थ है- मेल। वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल, कारक आदि का क्रिया के साथ ठीक-ठीक मेल होना चाहिए; जैसे- 'बालक और बालिकाएँ गई', इसमें कर्ता क्रिया अन्वय ठीक नहीं है। अतः शुद्ध वाक्य होगा 'बालक और बालिकाएँ गए'।



वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर

अर्थ के आधार पर वाक्य मुख्य रूप से आठ प्रकार के होते है-

(i) सरल वाक्य (Affirmative Sentence)

(ii) निषेधात्मक वाक्य (Negative Sentence)

(iii) प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative Sentence)

(iv) आज्ञावाचक वाक्य (Imperative Sentence)

(v) संकेतवाचक वाक्य (Conditional Sentence)

(vi) विस्मयादिबोधक वाक्य (Exclamatory Sentence) 

(vii) विधानवाचक वाक्य (Assertive Sentence) 

(viii) इच्छावाचक वाक्य (IIIative Sentence)


(i) सरल वाक्य :-

वे वाक्य जिनमे कोई बात साधरण ढंग से कही जाती है, सरल वाक्य कहलाते है।

जैसे- राम ने रावण को मारा। राधा खाना बना रही है।


(ii) निषेधात्मक वाक्य:-

जिन वाक्यों में किसी काम के न होने या न करने का बोध हो उन्हें निषेधात्मक वाक्य कहते है।

जैसे- आज वर्षा नही होगी। मैं आज घर नहीं जाऊॅंगा।


(iii) प्रश्नवाचक वाक्य:-

वे वाक्य जिनमें प्रश्न पूछने का भाव प्रकट हो, प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते है।

जैसे- राम ने रावण को क्यों मारा? तुम कहाँ रहते हो ?


(iv) आज्ञावाचक वाक्य :-

जिन वाक्यों से आज्ञा, प्रार्थना, उपदेश,अनुमति आदि का ज्ञान होता है, उन्हें आज्ञावाचक वाक्य कहते है।

जैसे- वर्षा होने पर ही फसल होगी। परिश्रम करोगे तो फल मिलेगा ही। बड़ों का सम्मान करो।आप अंदर आ सकते हैं।


(v) संकेतवाचक वाक्य:- 

जिन वाक्यों से शर्त्त (संकेत) का बोध होता है यानी एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर होता है, उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते है। 

जैसे- यदि परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होंगे। पिताजी अभी आते तो अच्छा होता। अगर वर्षा होगी तो फसल भी अच्छी होगी।


(vi) विस्मयादिबोधक वाक्य:-

जिन वाक्यों में आश्चर्य, शोक, घृणा आदि का भाव ज्ञात हो उन्हें विस्मयादिबोधक वाक्य कहते है।

जैसे- वाह !तुम आ गये। हाय !मैं लूट गया।


(vii) विधानवाचक वाक्य:- 

जिन वाक्यों में क्रिया के करने या होने की सूचना मिले, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते है। 

जैसे- मैंने दूध पिया। वर्षा हो रही है। राम पढ़ रहा है।


(viii) इच्छावाचक वाक्य:- 

जिन वाक्यों से इच्छा, आशीष एवं शुभकामना आदि का ज्ञान होता है, उन्हें इच्छावाचक वाक्य कहते है। 

जैसे- तुम्हारा कल्याण हो। आज तो मैं केवल फल खाऊँगा। भगवान तुम्हें लंबी उमर दे।



वाक्य के भेद- रचना के आधार पर


रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते है-

(i) साधारण वाक्य या सरल वाक्य (Simple Sentence)

(ii) संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)

(iii) मिश्रित वाक्य (Complex Sentence)


(i) साधरण वाक्य या सरल वाक्य:-

जिन वाक्य में एक ही क्रिया होती है, और एक कर्ता होता है, वे साधारण वाक्य कहलाते है।

दूसरे शब्दों में- जिन वाक्यों में केवल एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होता है, उन्हें साधारण वाक्य या सरल वाक्य कहते हैं।


इसमें एक 'उद्देश्य' और एक 'विधेय' रहते हैं। जैसे- 'बिजली चमकती है'। रोहन गाता है

इन वाक्यों में एक-एक उद्देश्य, अर्थात कर्ता और विधेय, अर्थात क्रिया है। अतः, ये साधारण या सरल वाक्य हैं।


(ii) संयुक्त वाक्य :-

जिस वाक्य में दो या दो से अधिक उपवाक्य मिले हों, परन्तु सभी वाक्य प्रधान हो तो ऐसे वाक्य को संयुक्त वाक्य कहते है।

दूसरे शब्दों में- जिस वाक्य में साधारण अथवा मिश्र वाक्यों का मेल संयोजक अवयवों द्वारा होता है, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं।

जैसे: मैं दिल्ली गया और लाल किला देखा।

 वह घर आया किंतु जल्दी ही चला गया।


(iii) मिश्रित वाक्य:-

जिस वाक्य में एक से अधिक वाक्य मिले हों किन्तु एक प्रधान उपवाक्य तथा शेष आश्रित उपवाक्य हों, मिश्रित वाक्य कहलाता है। 

दूसरे शब्दों में- जिस वाक्य में मुख्य उद्देश्य और मुख्य विधेय के अलावा एक या अधिक समापिका क्रियाएँ हों, उसे 'मिश्रित वाक्य' कहते हैं। 

जैसे- रवि ने कहा कि वह कल दिल्ली जाएगा।

जब बारिश हो रही थी मैं घर के भीतर था।



यहाँ कुछ और उदाहरण देकर विषय को स्पष्ट किया जाता है-


(क) सरल वाक्य से मिश्र वाक्य


सरल वाक्य- उसने अपने मित्र का पुस्तकालय खरीदा।

मिश्र वाक्य- उसने उस पुस्तकालय को खरीदा, जो उसके मित्र का था।

सरल वाक्य- अच्छे लड़के परिश्रमी होते हैं। 

मिश्र वाक्य- जो लड़के अच्छे होते है, वे परिश्रमी होते हैं। 

सरल वाक्य- लोकप्रिय कवि का सम्मान सभी करते हैं। 

मिश्र वाक्य- जो कवि लोकप्रिय होता है, उसका सम्मान सभी करते हैं।


(ख) सरल वाक्य से संयुक्त वाक्य


सरल वाक्य- अस्वस्थ रहने के कारण वह परीक्षा में सफल न हो सका। 

संयुक्त वाक्य- वह अस्वस्थ था और इसलिए परीक्षा में सफल न हो सका। 

सरल वाक्य- सूर्योदय होने पर कुहासा जाता रहा। 

संयुक्त वाक्य- सूर्योदय हुआ और कुहासा जाता रहा। 

सरल वाक्य- गरीब को लूटने के अतिरिक्त उसने उसकी हत्या भी कर दी। 

संयुक्त वाक्य- उसने न केवल गरीब को लूटा, बल्कि उसकी हत्या भी कर दी।


(ग) मिश्र वाक्य से सरल वाक्य


मिश्र वाक्य- उसने कहा कि मैं निर्दोष हूँ। 

सरल वाक्य- उसने अपने को निर्दोष घोषित किया। 

मिश्र वाक्य- मुझे बताओ कि तुम्हारा जन्म कब और कहाँ हुआ था। 

सरल वाक्य- तुम मुझे अपने जन्म का समय और स्थान बताओ। 

मिश्र वाक्य- जो छात्र परिश्रम करेंगे, उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी। 

सरल वाक्य- परिश्रमी छात्र अवश्य सफल होंगे।



(घ) कर्तृवाचक से कर्मवाचक वाक्य


कर्तृवाचक वाक्य- लड़का रोटी खाता है। 

कर्मवाचक वाक्य- लड़के से रोटी खाई जाती है। 

कर्तृवाचक वाक्य- तुम व्याकरण पढ़ाते हो। 

कर्मवाचक वाक्य- तुमसे व्याकरण पढ़ाया जाता है। 

कर्तृवाचक वाक्य- मोहन गीत गाता है। 

कर्मवाचक वाक्य- मोहन से गीत गाया जाता है।


(ड़) विधिवाचक से निषेधवाचक वाक्य


विधिवाचक वाक्य- वह मुझसे बड़ा है। 

निषेधवाचक- मैं उससे बड़ा नहीं हूँ। 

विधिवाचक वाक्य- अपने देश के लिए हरएक भारतीय अपनी जान देगा। 

निषेधवाचक वाक्य- अपने देश के लिए कौन भारतीय अपनी जान न देगा ?


'वह कौन-सा मनुष्य है, जिसने महाप्रतापी राजा भोज का नाम न सुना हों'।



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